सन्नाटे

देखा था मैंने उसे
सन्नाटों में झांकते हुए
कुछ खुद के, कुछ मांगे हुए सन्नाटे !

सन्नाटे भी अजीब से
मांग में सिंदूर का सन्नाटा
…. चूल्हे का सन्नाटा
…. सच का सन्नाटा
सभी जी रहे हैं अपने सन्नाटे !

सन्नाटे जो टूटते नहीं
फैलते जाते हैं
मेरा तुझमें, तेरा किसी और में
न कोई इलाज़, न सब्र रुकने का

और सन्नाटे निगल जाते हैं आहिस्ता आहिस्ता !

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