रिश्ता-हमारा

हमारा रिश्ता टूट रहा था
जन्म से पूर्व का रिश्ता
मेरा और आसमां के सबसे खूबसूरत तारे का !

पूरी सृष्टि थामे हुए थी
हमें, हमारे रिश्ते को
हर सुबह से शाम के रिश्ते को !

तुम सुबह अपनी ज़ुल्फों  को मेरे चेहरे पर छितराती हो
मैं आधा सोया खोया तुममें, तुम्हारी कच्ची सुगंध में
उठने की सुध तक भुला बैठता हूँ !

हमारा रिश्ता सुबह, दोपहर और शाम से कहीं ज्यादा
हमारा रिश्ता है जीवन का रिश्ता
हर पल हम एक होने को आतुर !

क्या कभी पास भी आओगे
या बस यूँ ही दूर से तरसा के
रोज़ की तरह चले जाओगे
… आसमां  भी दर्द की लालिमा में रंगने लगा है !

ये विरह क्यों?
ये झील का चंचल पानी
ये प्रेमातुर पंछी, ये पागल बयार, तुम्हारी परछाई
करने लगे हमें जुदा करने की कोशिश !

पर उन्हें क्या पता
हमारा मिलन तो शरीर से कहीं परे
आत्मा में स्थित है !

तुम्हारा अस्त होना
हमारे उदय होने सा है

हम दो शाश्वत प्रेमी !

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